Dr. Bindu Shrivastava
इनका जन्म सन् 1866 ई– को हुआ था । उनके पिता का नाम पुरुषोत्तमदास और पितामह का नाम संगमलाल अग्रवाल था जो काशी के धनी व्यक्ति माने जाते थे । रत्नाकर जी की प्रारंभिक शिक्षा फारसी में हुई । उसके पश्चात् इन्होंने 12 वर्ष की अवस्था में अंग्रेजी पढ़ना प्रारंभ किया और यह प्रतिभाशाली विद्यार्थी सिद्ध हुए ।
रत्नाकर जी ने अपनी आजीविका के हेतु 30–32 वर्ष की अवस्था में जरदेजी का काम आरंभ किया था । उसके उपरांत ये आवागढ़ रियासत में कोषाध्यक्ष के पद पर नियुक्त हुए । भारतेंदु जी के संपर्क और काशी की कविगोष्ठियों के प्रभाव से इन्होंने 1889 ई– में ब्रजभाषा में रचना करना आरंभ किया । रत्नाकर जी की सर्वप्रथम काव्यकृति ‘हिंडोला’ सन् 1894 ई– में प्रकाशित हुई । सन् 1893 में ‘साहित्य सुधा निधि’ नामक मासिक पत्र का संपादन प्रारंभ किया तथा अनेक ग्रंथों का संपादन भी किया जिनमें दूलह कवि कृत कंठाभरण, कृपारामकृत ‘हिततरंगिणी’, चंद्रशेखरकृत ‘नखशिख’ हैं । नागरीप्रचारिणी सभा के कार्यों में रत्नाकर जी का पूरा सहयोग रहता था । सन् 1897 में रत्नाकर जी ने ‘घनाक्षरी नियम रत्नाकर’ प्रकाशित कराया और 1898 में ‘समालोचनादर्शन’ (पोप के ‘एस्से ऑन क्रिटिसिज्म’ का अनुवाद) प्रकाशित हुआ ।
सन् 1932 ई– की 21 जून को इनका अचानक स्वर्गवास हो गया ।
-
Bhartiya Arthvyavastha Ke Vividh Aayam
Rs. 300.00 -25% OFF Rs. 225