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Naina Ke Sapne

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टीचर जी कहती हैं सितारों को छूने के सपने देखो । सच्चे मन से देखे गए अच्छे सपने ज़रूर सच होते हैं । टीचर जी ने यह बात हमारे पूर्व राष्ट्रपति माननीय अब्दुल कलाम जी से सीखी है । उनका प्रसिद्ध कथन है, ‘सपने वे नहीं होते, जो नींद में देखे जाते हैं, सपने वे होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते ।’ दस वर्ष की नैना को इस तरह की बातें बड़ी अच्छी लगती हैं । वह जानती है कि कुछ पाने के लिए सच्ची इच्छा का होना बहुत ज़रूरी है । जब तक मन में लगन न हो, तब तक इंसान अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच सकता । मन में लगन हो तो इंसान सितारों तक पहुँच जाता है । सितारों से उसे प्यार है । कई बार रात में खुले में खड़ी हो वह आकाश के तारे देखती है । जब ज्यादा ठंड हो तो बरामदे में बैठती है या कमरे की खिड़की से आकाश को देखती है । वह तारों को अच्छी तरह पहचानती है । कौन सा तारा किस दिशा में दिखता है, कितनी देर आकाश में रहता है, कब पेड़ों के पीछे चला जाता है, उसे सब पता है । ‘चंदा मामा दूर के, पुए पकाएँ बूर के’—नैना चाँद को सुनाती है । कभी गुनगुनाती है, ‘एक थाल मोतियों से भरा, सबके सिर पर उल्टा धरा!’ कभी ‘ट्विंकल–ट्विंकल लिटिल स्टार’ गाती है । शिशुगीत गाने के हिसाब से वह काफ़ी बड़ी हो गई है, फिर भी चंदा–सितारों के गीत उसे अच्छे लगते हैं ।

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