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Pari Ki Payal

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तभी श्वेता परी को सिसकियों की आवाज सुनाई दी । उसने चौंककर देखा, कुछ दूर स्थित एक घने पेड़ के नीचे बैठी एक स्त्री बिसूर रही है, ‘कल सुबह मेरा मोहन कितना दुखी होगा, जब उसे खीर की जगह पतीली में सिर्फ उबला पानी मिलेगा । हाय, मैं कितनी अभागी माँ हूं, जो अपने बेटे की एक छोटी–सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकी ।’ श्वेता पल भर में सब कुछ समझ गई । सिर्फ समझी नहीं, उसने अपना अगला कदम भी फौरन तय कर लिया । जैसे ही जादू की छड़ी घुमाई, पूरी पतीली केसर–इलायची की खुशबू से गमकती हुई मेवे–मखानों की खीर से लबालब भर गई । इस खीर का स्वाद श्वेता जानती थी, उसे चखने की जरुरत न थी । उसे याद आया, उसकी सहेलियां उसे ‘चटोरी’ कहकर चिढ़ाती हैं । आधी रात को जाकर सबकी खीर जूठी कर आने के लिए उसे लज्जित भी करती हैं । लेकिन आज इसी चटोरपन की वजह से तो वह एक गरीब परिवार की रोती आंखों में मुस्कराहट भर सकेगी । --‘पतीली में खीर’ कहानी से

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