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Rahabaz

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यह बात खयाल में आते ही मेरे मन में अगला जो विचार आया था, वह बचपन में स्कूल में पढ़ी महाभारत की उस कथा का, जिसमें कुंती सूर्य का आह्वान करती है और उसे कर्ण पैदा होता है । बाद में कमज़ोर पांडू के साथ शादी के बाद भी कुंती इसी तरह अलग–अलग पुरुषों से नियोग कर के पांडव पैदा करती है । नियोग का मतलब बड़े हो कर जाना था । तब हैरान रह गयी थी । हिन्दू माइथोलॉजी में कैसे–कैसे विरोधाभास भरे पड़े हैं । अब दिमाग और दिल में बस एक ही शब्द गूँज रहा था नियोग ।

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