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Satyabhakt Aur Bhartiya Samyavadi Party
भारतीय साम्यवादी पार्टी के संस्थापक सत्यभक्त जी पर हिन्दी में संभवत: यह पहली व्यवस्थित पुस्तक है । आज से सौ साल पूर्व भारत में साम्यवादी पार्टी का गठन एक ऐतिहासिक घटना थी । इस बात को कम ही लोग जानते होंगे कि भारत में साम्यवादी पार्टी की स्थापना एक नहीं, दो बार हुई और लगभग साथ–साथ हुई । एक इतिहास में गतांक हो गया या उसे सायास गतांक कर दिया गया ? बहरहाल! दूसरी साम्यवादी पार्टी चढ़ाव–उतार के साथ विकसित हुई । एक का नाम था ‘भारतीय साम्यवादी पार्टी’ और दूसरे का ‘भारत की साम्यवादी पार्टी’-जिसका केन्द्र मास्को में था जिसकी यह भारतीय शाखा स्थापित की गई थी । इसकी स्थापना के लिए धन भी एम.एन. राय द्वारा बाहर से आता था । सत्यभक्त जी ने जिस ‘भारतीय साम्यवादी पार्टी’ की स्थापना की वह पूरी तरह से भारतीय थी और उसके नियामक सिर्फ यही के लोग थे । धन चंदा से जुटाया गया था । वे खुद इसके संचालक थे । नाम में यह बात भले मामूली लगे लेकिन यह साम्यवादी विचारों का पूरी तरह देशीकरण का मामला था, न कि आयात कर कलमी रोपने का कोई उद्यम था । क्या इस अंतर में आज के साम्यवाद के दशा को हम आकलित कर सकते हैं ? यह किताब इस सवाल को और तीखा करती है ।
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