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Swatantryottar Bhartiya Rajniti

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भारतीय राजनीति को एक सतत प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए जहाँ पर राजनीतिक प्रश्न बहुत ही महत्त्वपूर्ण हो जाता है । अगर हम राजनीति को सतत प्रक्रिया मान रहे हैं, तो इसमें कुछ मुद्दे बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहे हैं जो भारतीय राजनीति को प्रभावित किए है । दूसरे शब्दों में भारतीय राजनीति को दो भागों में समझने का सीमित प्रयास किया गया है : पहला कि राजनीति की इस सतत प्रक्रिया में 1947 से वर्तमान में क्या परिवर्तन आये हैं । दूसरा, वह क्या मुद्दे रहे हैं जो भारतीय राजनीति को प्रभावित किए हैं । इस किताब में कुछ मुद्दों को ही लिया गया है । यह इस किताब की एक सीमा भी है । महेन्द्र प्रसाद सिंह का लेख (पहला अध्याय : ‘आधुनिक भारतीय राज्य की विकासवादी पृष्ठभूमि’) वर्तमान भारतीय राजनीति को समझने में भूमिका का काम करता है । सिंह के अनुसार ‘उत्तर–औपनिवेशिक उदारवादी–लोकतान्त्रिक भारतीय राज्य’ की जटिल पृष्ठभूमि है जो ऐतिहासिकता से उपजी है । नेहरूवादी राजीनीति, भूमंडलीकरण की राजनीति और हिन्दुत्व की राजनीति के राज्य पर हुए असर को समझने के लिए हमें राज्य के चार प्रमुख संक्रमणों का आकलन करना जरूरी हैंय भारतीय राज्य के चार प्रमुख संक्रमण हैं : ‘राज्य के पूर्व की सामाजिक संरचना से राज्य का निर्माण’, ‘क्षेत्रीय राजतन्त्र से उपमहाद्वीपीय राजतन्त्र का विकास’, ‘केन्द्रीभूत अधिकारितान्त्रिक व राजतान्त्रिक राज्य का सामन्तवादी राजतन्त्र में परिवर्तन’, और ‘मध्यकालीन सामन्तवादी राजतन्त्र का आधुनिक ब्रिटिश भारतीय अधिकारितान्त्रिक राजतन्त्र में रूपांतरण’ । यह लेख मुख्यत: राज्य के ऐतिहासिक उद्भव का वृत्तान्त है जो वर्तमान की राजनीति को समझने में मदद करता है ।

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