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Aangan Mein Jhuka Aasmaan
प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ दो सदियांे के दो पाट में विभक्त बीसवीं सदी का साठ–सत्तर वाला दशक तथा इक्कीसवीं सदी के प्रथम भाग की संलग्नता के बीच मिश्रित वि/ााओं को अपनाती कागज के पन्नों पर उतरी हैं । पिछली सदी की बत्तीस कविताएँ ‘/वनि संकेत से लेकर कड़ियाँ भेद’ तक उस समय लिखी गई थीं जिस समय गिंसवर्ग बनारस आए हुए थेµराजकमल चैधरी का भी ‘मुक्ति प्रसंग’ प्रकाशित हुआ था । तभी कुछ मित्रों ने उक्त कविताओं को समय से पूर्व आने की बात कहीं थी । पता नहीं, इस लंबे अंतराल में वह समय आया अथवा नहीं या किसी भंवर–जाल में फँसा रह गया । अत% उसके शापो/ाार हेतु मैं यहाँ बतला देना चाहूँगा कि किसी भी साहित्य का प्रस्फुटन मूलत% काव्यकली के रूप में होता आया हैं वाद में वह पद्य तथा गद्य के आकार में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज एवं निबं/ा आदि वि/ााओं का रूप ग्रहण करता है । फिर होता है उसका बौधिक एवं सामाजिक, /ा्रुवीकरण–––सम्यक विचारों का आदान–प्रदान तथा उसका प्रवाहित ज्ञान जहाँ इस कवलित जिज्ञासा का एक मात्र उत्तर बनता है काव्यबोध!
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