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Dekhte Parkhte Hue
चर्चित युवा कथाकार अभिषेक कश्यप के समीक्षा आलेखों की यह पुस्तक अपने पाठ में रचनात्मक साहित्य का सुख देती है । उलझाव भरे, अपठनीय, निरर्थकता की हद तक अबूझ अकादमिक किस्म की समालोचना से परे यह किताब समीक्षित पुस्तकों से एक सहज, सजग संवाद करती जान पड़ती है । यहां हम एक युवा कथाकार के सरस गद्य के साथ एक साहित्यरसिक पाठक/अ/येता की पैनी नज़र को समानांतर रूप से सक्रिय पाते हैं । इस पुस्तक में लेखक ने महाश्वेता देवी, राजेंद्र यादव, इंतजार हुसैन, इस्मत चुगताई, काशीनाथ सिंह, असगर वजाहत, स्वदेश दीपक, अरूण प्रकाश, संजीव, स्वयं प्रकाश सरीखे कई वरिष्ठ रचनाकारों की महत्वपूर्ण कृतियों को अपनी प्रखर समालोचकीय दृष्टि से देखने–समझने का प्रयास किया है । खास बात यह कि इस पुस्तक में हिंदी के साथ–साथ उर्दू, बांग्ला, पंजाबी, अंग्रेजी और विदेशी भाषाओं (स्पेनिश, कातालान) से हिंदी में अनूदित कई चर्चित कृतियों की समीक्षाएं भी शामिल हैं, जिससे इस संकलन का महत्व और भी बढ़ जाता है । कई वरिष्ठ लेखकों की चर्चित कृतियों को एक सजग, समालोचकीय नज़र से देखते/परखते हुए अभिषेक जिस दो टूक अंदाज में अपनी बात रखते हैं, उससे उनकी वैचारिक तेजस्विता और बौद्धिक आत्मविश्वास का परिचय मिलता है । पाठकों, विद्यार्थियों और शो/ाार्थियों के लिए समान रूप से उपयोगी एक महत्वपूर्ण पुस्तक ।
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