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Hindi Ke Naamvar
डॉ– नामवर सिंह हिंदी के समकालीन आलोचकों में अग्रगण्य हैंं । केवल अग्रगण्य नहीं, वे अनेकानेक कारणों से हिंदी जगत के जीवित मिथक भी बन गए हैं । -विश्वनाथ त्रिपाठी आज यह पुरजोर होकर कहा जा सकता है कि नामवरजी के व्याख्यानों की प्रतीक्षा हिंदी क्षेत्र के श्रोता करते रहे । उनके व्याख्यानों ने हिंदी के नए पाठक बनाए, हिंदी प्रेमियों का विस्तार किया । -खगेंद्र ठाकुर नामवर जी का वैदुष्य उनके चिंतन की नवीनता, उनकी निर्भयता तथा उनके कौशल और अनुशासनप्रियता को देखकर मेरे मन में उनके प्रति जो आदर का भाव था, वह शतगुणित हो गया । अब वह भाव श्रद्धा में बदल चुका है । -नंदकिशोर नवल जब वे विचारधारा और राजनीति से मुक्त होकर शुद्ध एकेडमिक स्तर पर बोलते हैं तो उनका अध्ययन और पांडित्य प्रभावित करता है । बीच–बीच में व्यंग्य और विनोद द्वारा अपने व्याख्यानों को मनोरम बनाए रखते हैं । -विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
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