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Hindi Sahitya ka Durlabh Paripekchhya (3Vol.)

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राजेन्द्र यादव के संपादन में निकलने वाली ‘हंस’ मासिक पत्रिका में लंबे अरसे तक ‘समकालीन सृजन संदर्भ’ शीर्षक से स्तंभ लिखने वाले भारत भारद्वाज ने ‘हिंदी साहित्य का दुर्लभ परिप्रेक्ष्य’ शीर्षक से तीन खण्डों में पुस्तक का संपादन किया है । इन पुस्तकों के संपादक की ख्याति प्रखर चिंतक और खोजी प्रवृत्ति के रूप में रही है । उन्होंने इन पुस्तकों में जिन लेखों का संकलन किया है, सचमुच वह दुर्लभ सामग्री है जो आसानी से कहीं उपलब्ध नहीं हो पाती है । ‘हिंदी साहित्य का दुर्लभ परिप्रेक्ष्य’ के पहले खंड में आपका साक्षात्कार उन लेखों से होगा जिनकी चर्चा आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन अनुपलब्धता के कारण पढ़ने को नहीं मिले होंगे । इसमें तुलसीदास सहित कई ऐसे विषयों से संबंधित उन आलेखों को संकलित किया गया है जिनकी चर्चा तो खूब हुई लेकिन आज तक उन लेखों को उपलब्ध कराने का बीड़ा किसी ने नहीं उठाया । अब आप यहां उन लेखों को एक जगह पढ़ सकेंगे । संभवत% पहली बार किसी संकलन में इतने महत्वपूर्ण लेखों को एक पुस्तक में पढ़ने का अनोखा अनुभव हासिल किया जा सकेगा । पुस्तक के दूसरे खंड में आधुनिक हिंदी साहित्य से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को संगृहीत किया गया है । संपादक ने गालिब से लेकर धूमिल तक के महत्व को बड़ी शिद्दत से समझा है और इससे संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण आलेख संकलित किये हैं ।

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