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Kahan Gaye Ve Log
दादा साहब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण करते वक्त इस बात की कल्पना भी नहीं की होेगी कि वे भारत में मनोरंजन के सबसे बड़े उद्योग की शुरुआत कर रहे हैं । ‘राजा हरिश्चंद्र’ पहली मूक पफीचर फिल्म थी जो पौराणिक कथानक पर आधारित थी । 1913 से 1931 तक जिन फीचर फिल्म का निर्माण हुआ, वे पौराणिक कथाओं पर ही आधारित थीं । 1931 में ‘आलम–आरा’ के साथ भारतीय सिनेमा ही नहीं, फिल्म संगीत उद्योग के भी एक नए युग का सूत्रपात हुआ । अब तो यह भी देखने में आया है कि बहुधा फिल्म का संगीत, पिफल्म से ज्यादा मुनाफा कमाता है । दादा साहब फाल्के और आर्देशीर ईरानी ने जिस फिल्म उद्योग की स्थापना की थी, उसे बुलंदियों तक पहुंचाने वाले थे- महबूब खान, देवकी बोस, नितिन बोस, वी. शांताराम, ए. आर. कारदार, राज कपूर, विमल रॉय और गुरुदत्त । यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि हिंदी सिनेमा में कई सिनेमा निहित हैं । महबूब खान, वी. शांताराम, विमल रॉय, राज कपूर और गुरुदत्त का सिनेमा उनका हस्ताक्षरित सिनेमा है ।
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