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Rashtravad : Sandarbh Aur Paripekshya
ऐतिहासिक विकास के संदर्भों में राष्ट्रीय अस्मिता अथवा पहचान का अंगीकरण एक प्रभावशाली समूह की प्रतिक्रिया का परिणाम होती है । ये समूह अपनी परम्परागत पहचानों से असंतुष्ट होकर उनको पुनर्परिभाषित करने के इच्छुक होते हैं । इस असंगति के निराकरण के लिए वे राष्ट्रवादी अभिप्राय की ओर उन्मुख होते हैं । बहुराष्ट्रीय राज्य में अल्पसंख्यक समूह भी अपनी राष्ट्रीय आकांक्षा और पहचान की स्वीकृति के अधिकार के लिए सचेष्ट रहते हैं । अमरीकी क्रांति से शुरू होनेवाली राष्ट्रवाद की चेतना दो शताब्दियों तक इतिहास की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक शक्ति बनी रही । दोनों विश्व युद्धों की आधारिक अवधारणा के रूप में भी राष्ट्रवाद केन्द्र में रहा है । फासिज्म भी चरम एवं अधिनायकवादी राष्ट्रवाद का ही एक स्वरूप है । - इसी पुस्तक से
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