- New product
Sahitya Ka Itihas Darshan
आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की पुस्तकों में सबसे महत्व की पुस्तक ‘साहित्य का इतिहास–दर्शन’ को माना जाता है । यह पुस्तक उनके निधन के लगभग एक साल पूर्व 1960 ईस्वी में प्रकाशित हुई । जब हिन्दी साहित्य और साहित्येतिहास लेखन में ‘इतिहास–दर्शन’ की चर्चा लगभग न के बराबर थी, नलिन जी ने हिन्दी साहित्य को इससे परिचित कराया । इस दृष्टि से ‘इतिहास–दर्शन’ पर हिन्दी में यह पहली पुस्तक है । हिंदी में साहित्य–शोध, उसकी हिस्टोरियोग्राफी और शोध–सैद्धांतिकी के क्षेत्र में इस पुस्तक का महत्व आई– ए– रिचर्ड्स की पुस्तक ‘प्रिंसिपल ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्म’ के बराबर नहीं तो उससे कमतर भी नहीं है । बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् की भाषण–माला–योजना के तहत इसका प्रकाशन हुआ । ऐसा कहा जाता है कि तत्कालीन परिषद् सभापति बाबू शिवपूजन सहाय ने पृष्ठ संख्या 200 से कम होने पर नलिन जी को कहा कि परिषद् के नियमानुसार हम दो सौ से कम पृष्ठ की किताब नहीं छाप सकते, अत: आप कुछ चीजें और जोड़कर इसे छापने योग्य बनाएँ । पर, नलिन जी इसके लिए तैयार नहीं थे । अत: बीच का रास्ता निकाला गया और शिवपूजन सहाय के ही सुझाव पर अँग्रेजी सहित कुछ अन्य योरोपीय भाषाओं में शोध–महत्व की पुस्तकों की सूची जोड़कर इसे परिषद् के नियमानुकूल प्रकाशन के लिए उपयुक्त बनाया गया । यह पुस्तक प्रचलित अर्थों में ‘साहित्य का इतिहास’ नहीं है । बल्कि ‘साहित्येतिहास का दर्शनालोचन’ है । इस पुस्तक में ‘साहित्येतिहास’ नामक भवन के निर्माण में जो तत्व, प्रवृत्तियाँ, बोध, विचार और दृष्टि ज़रूरी होती हैं, उनका विवेचनात्मक परिचय दिया गया है । --- विनोद तिवारी
You might also like
-
'Amola' Ki Kisuli
Rs 295 Rs 221.25 25% OFF -
'Kitne Shahro Mein Kitni Baar' Mein Chitrit Parivesh
Rs 275 Rs 206.25 25% OFF -
Aadhunik Awadhi Kavya Prakriti Chitran
Rs 395 Rs 296.25 25% OFF -
Aadhunik Ram Kavya Ki Parampara
Rs 525 Rs 393.75 25% OFF -
Aadhunik Urdu Gazal
Rs 525 Rs 393.75 25% OFF