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Srajnatmakta Ke Aayam : Arun Kamal
हिंदी के प्रख्यात कवि तथा साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त अरुण कमल की रचनाएं अपनी सहजता व विशिष्टता, दोनों के कारण सामान्य पाठकों से लेकर परम प्रबुद्ध आलोचकों का /यान अपनी ओर खींचती रही हैं । यह पुस्तक भी अरुण कमल की काव्य–संवेदना, भाषा–शिल्प और उनकी जीवन दृष्टि के विभिन्न पक्षों को समझने का प्रयास करने के उद्देश्य से प्रकाशित हो रही है । पुस्तक में कविता का अर्थ ही नहीं तलाशा गया है बल्कि रचे हुए हर शब्द की ताकत और उत्तर भारत के गांव–कस्बों की सांस्कृतिक परंपरा से उनके संबंधों का भी संधान किया गया है । लेखकों ने अपने सृजनशील मस्तिष्क व अपनी दृष्टि से उनकी कविता की जमीन को परखा, जांचा और विश्लेषित किया है । इससे जमीन से जुड़ी उनकी कविताएं स्वयं कविता की जमीन का भी विस्तार करने में सक्षम प्रतीत होती हैं । इसी प्रक्रिया में अरुण कमल की कविता ने विभिन्न रंगों व दृष्टियों से अपने को व्याख्यायित होते हुए भी पाया है । पाठक इसे महसूस करते हैं कि उनकी कविताओं का केंद्रीय भाव हैµअन्याय का विरोध । कविताओं में बेबस कंगालों और बर्बर अमीरों में बंटी दुनिया के खिलाफ आक्रोश को काव्यात्मक भाषा में केवल किसी तटस्थ कलाकार की तरह सजाया नहीं गया है बल्कि बेहतर संसार के स्वप्न के बलबूते उसकी तपिश को भी पाठकों को महसूस कराया गया गया है ।
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