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Apritam Hindi Geet Shatak

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वस्तुतः प्रेम ही गीत का मूल स्वर है और यही तत्व गीत को उसका आकार और स्वरूप देता है । प्रेम की यह अभिव्यक्ति प्रेयसी के प्रति, प्रकृति के प्रति और अपने देश के प्रति अनेकानेक रूपों में मुखरित होती संकलन के गीतों में झलकती है । हमारे कोमलतम भाव प्रणय गीतों में व्यक्त होते हैं और संकलन में स्वाभाविक रूप से सर्वाधिक गीत इसी श्रेणी के हैं । इन प्रणय गीतों में संयोग, वियोग, उपालंभ, रूप सौंदर्य वर्णन सब समाहित हैं । प्रेम के ऐन्द्रिय और सूक्ष्म दोनों पक्षों का सुन्दर चित्रण इन गीतों में हुआ है । प्रकृति से मनुष्य के तादात्म्य को प्रदर्शित करने गीत भी उल्लेखनीय हैं जिनमें मेघ, पुरवाई, चांदनी, नदी, वन, पुष्प, ऋतु, किरण और विहग आदि प्रकृति के सभी पक्षों को अत्यंत मोहक ढंग से उकेरा गया है । चूंकि हिन्दी गीतों का जन्म पराधीनता के दौर में तथा विकास स्वाधीनता संघर्ष के समानान्तर हुआ इसलिए देश प्रेम से ओतप्रोत गीतोें की भी बड़ी संख्या है । ऐसे गीतों में महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, गांधी तथा सुभाष के साथ देश पर जान न्योछावर करने वाले सैनिकों को भी भावांजलि दी गई है ।

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