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Khandit Manav Ki Kabragah
पहली बात तो अपनी असलियत न स्वीकार करना कायरता का सूचक है, दूसरा कोई भी बात जितने माध्यमों से घुमा–घुमाकर कही जाए उतने ही हिस्सों में हृदय विभाजित होता है, व्यक्तित्व खंडित होता हैंय एक तरह से अखण्ड आदमी खोजना नामुमकिन है, फिर खंडित आदमी द्वारा किया गया प्रेम, कार्य और उस कार्य के परिणाम कैसे अखंड हो सकते हैं, प्रकृति और उसका अस्तित्व अखंड, अविभाजित है क्योंकि वह बिना प्रयासों, बिना सुविधाओं को देखे अपनी रफ्तार से चल रहा हैं जबकि आदमी का अस्तित्व खंडित है क्योंकि इसमे सुविधाओं को देखकर कदम बढ़ाए गए हैं, यह पूरी दुनिया इस दृष्टिकोण के कारण ‘खंडित मानव की कब्रगाह’ बनकर रह गयी है जबकि ठीक इसके विपरीत असुरक्षा जीवंतता है ।
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